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कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुवा था?

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कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुवा था?


कश्मीर की कड़कड़ाती ठण्ड में, रात के अँधेरे को चीरते हुए मस्जिदों के लाउड स्पीकर्स से धमकी दी जा रही थी, या तो मुसलमान बनो, या कश्मीर छोड़कर भाग निकलो. कश्मीरी पंडित... कश्मीर की वादियों का मूल निवासी. खुद अपनी और अपने परिवार की जान की फ़िक्र में उस काली रात में जाग रहा था, फीकी पड़ी आँखें... कल का सूरज देखना नसीब भी होगा?


आज दिन में देखा हुवा एक पोस्टर उसके कलेजे को चीर कर रख देता हैं जिसमे लिखा होता हैं अपनी बेटियों को औरतो को यहीं रहने दो और सब पंडित पुरुष कश्मीर छोड़कर निकल जाए... उसकी तो मानो जैसे सास थमी हो, और एक एक पल एक साल जैसा लगने लगा.

उसने आज दिन में ये भी देखा था पड़ोस के कश्मीरी पंडित के घर पर एक कुछ सौ लोगों का झुण्ड चलकर आया. फिर झुण्ड उसे घसीट कर बाहर निकालता हैं और मार देता हैं. उस घर की महिलाओं पर बड़ी बेरहमी से बलात्कार किया जाता हैं. उसके घर में होने की खबर उसका पडोसी ही उस झुण्ड को देता हैं... वहीँ पडोसी जिसके साथ वह ईद भी उतनी ही ख़ुशी से मनाता था जितना अपने लिए दिवाली. वह सूरज उसकी जिंदगी में कभी उग पाया? पता नहीं.


मगर आज से ठीक ३० साल पहले हजारो कश्मीरी पंडितों ने इस भयंकर परिस्थिति को अपने आँखों से देखा हैं. जो किस्मत वाले थे वह भाग निकले और ..... हजारो उस #MobLynching की बलि चढ़ गए. पर इस Mob Lynching के खिलाफ कितने लोग बोले?

#MobLynching अभी का एकदम हॉट टॉपिक बोल सकते हैं. चोरी करने के लिए कोई मुस्लिम युवक पहुँचा लेकिन लोगों के हत्थे चढ़ गया. एक झुंड ने उसे झाड़ को बांध कर उसे खूब पीटा. जय श्रीराम के नारे भी लगवाने की बात आगे आयी. जिसमे उस शख्स की मौत हो गयी.


चोरी करते समय पकड़ा जाना, एक्सीडेंट में ड्राइवर को पकड़कर मारना पिटना. बच्चे चुराने की अफवाह फैला कर निर्दोष व्यक्ति की हत्या कर देना ये घटनाएं आये दिन हो रही हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं. इस तरह की किसी भी कत्लेआम  का कभी भी समर्थन  नहीं किया जा सकता. दोषियों पर कानून के अनुसार उचित एक्शन होगा ही. क्यों की वह सबके लिए एक हैं.

मगर दिक्कत तब होती हैं जब कुछ लोग ऐसी घटनाओं में राजनीती ढूंढते हैं. और अपने फायदे के लिए ऐसी घटनाओं को अपने ढंग से ढालने लगते हैं.

बस फिर क्या था... ट्विटर और सारा सोशल मीडिया दो धड़ों में बट गया. कुछ लोग ये पक्का समझ रहे हैं की मुसलमानों पर इस देश में काफी अत्याचार किये जा रहे हैं और यहाँ का मुस्लिम काफी डरा हुवा हैं. आइये दोस्तों एक डरे हुए मुसलमान मुफ़्ती का ट्विटर पे वायरल हुवा वीडियो देखते हैं.

अब इस मुफ़्ती को क्या कहे? ये डरी हुयी कौम हैं? क्या ये सच में मारे गए पीड़ित को सही न्याय भावना रखता हैं? या अपने किसी आका के राजनीतिक फायदे के लिए ये मुसलमानों को भड़काया जा रहा हैं?

या ये भी कहें की मस्जिदों, मदरसों में जो पढ़ाया जाता हैं वह कैमरा के सामने बाहर आया हैं. अगर लिंचिंग का मामला नहीं होता तो? क्या ये मुल्ला ऐसा बोलता?


बिलकुल बोलता... कभी वन्दे मातरम, कभी शाहबानो, केस, कभी सलमान रश्दी, कभी तीन तलाक मुद्दा, कभी रस्ते पर नमाज.... ऐसे लोग हर बार जहर उगलने से बाज नहीं आये. कुछ माह पूर्व रोहिंग्या को शरण देने के मुद्दे पर ऐसे ही किसी सरफिरे की इस देश की हिन्दू कौम को ख़त्म करने की वीडियो वायरल हुयी थी.

मतलब पिटारे में छिपा हुआ साप बाहर आया हैं. चाहे लिंचिंग हो या ना हो...

ऐसे जाहिल और गंवार कठमुल्ले किसी भी बहाने से हिन्दुओं को धमकाते रहेंगे और हिन्दू क्या कर रहे हैं? देखिये....



मैं इस बहन को धन्यवाद देता हूँ. ऐसे माहौल में ये एक आशा का किरण बन कर उभरी हैं. ऐसा करने से ही मुस्लिमों का इस देश के प्रति विश्वास बढ़ेगा ऐसा गांधीजी भी मानते हैं.

मगर इस बहन को कोई ये भी जरूर बता दे की ऐसे ही मोब लिंचिंग से २.५० लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से पलायन करना पड़ा.... हजारो को दिन दहाड़े मारा गया, उतनीही मां बहनों की इज्जत उछाली गयी... और एक भी मुसलमान ऐसा पोस्टर लेकर कभी सामने नहीं आया. क्यों? क्या कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुवा वह मोब लिंचिंग नहीं हैं?

यही हैं सर्वधर्मसमभाव. गांधीजी जैसी दोगले सेकुलरिज्म की सोच रखनेवालों की वजह से, हिन्दुओं को तब से अब तक शर्मसार ही होना पड़ता हैं, जब हम किसी हिन्दू के साथ हुए मोब लिंचिंग के खिलाफ आवाज उठाते हैं. पाखंड की सीमा हो चुकी हैं. सोशल मीडिया के इस दौर में ये दोगलापन बार बार उजागर होता हैं तो हिन्दुओं को कम्युनल बताया जाता हैं.

सच्चाई ये हैं की सरेआम हिन्दुओं का कत्लेआम करने की सोच रखने वाले मुसलमान भारतीय उपमहाद्वीप में क्या कर रहे हैं?

वह भारत, श्रीलंका, म्यांमार में किसी और के साथ  रहना नहीं चाहता और पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में किसी और को साथ रखना नहीं चाहता. ये हैं डरा हुवा मुसलमान?


अब इस ईमानदार बहस को देखे...


अब कोई ये ना कहें की यूरोप और अमेरिका में भी मुसलमानों से मोब लिंचिंग हो रही हैं. जिसकी प्रतिक्रिया में ये कठमुल्ला वाइट हाउस पर भी इस्लाम का परचम लहराना चाहता हैं.

मुसलमान फिर भी डरा हुवा हैं? शायद... लेकिन वह हिन्दू, क्रिस्टियन या ज्यू से नहीं. वह अगर डरा हुवा होगा तो ऐसे मुल्लों से जो अपने जन्नत के नशे में चूर होकर उसको  मरवाना चाहते हैं. और इनका दुर्भाग्य ये हैं की, सच्चाई झूठलाने वाले सेक्युलर और कट्टरता वादी मुसलमानों की इस देश में बाढ़ आयी हुयी हैं. 


सोशल मीडिया में के इस दौर में  हमेशा बेनकाब होनेवाले इस झूठे और दोगले सेकुलरिज्म ने ७२ सालों में ही इस देश को फिर से टूटने की कगार पर लाकर खड़ा किया हैं..... और बेबस कश्मीरी इस देश के सबसे बड़े Mob Lynching की आग में जलकर आज भी पुनर्वास शिबिरों में अपनी जिंदगी बीता रहा हैं....



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