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Kashmir People & War on Terror


Kashmir People & War on Terror:


Mohammed Yousuf Tarigami

article 

सीताराम येचुरी (Secretary, Communist Party of India Marxist) और डी. राजा (Secretary, Communist Party of India) को शुक्रवार ९ अगस्त को श्रीनगर हवाई अड्डे पर रोका गया.


जब ये न्यूज़ पढ़ने में आयी तो उसमे लिखा था की दोनों भी नेता कश्मीर के पूर्व एमएलए और माकपा नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी को मिलने गये थे.  श्री. येचुरी और डी. राजा,  मो. युसूफ राजा तारिगामी की तबियत का हाल जानने के लिए उनसे मिलने गए थे.

मन में सवाल ये उठा की कश्मीर जहाँ जिहाद और पाकिस्तान पुरस्कृत दहशतगर्दी के अलावा कुछ सुनने में नहीं आता वहां सीपीआईएम जैसे पार्टी का कोई एमएलए या नेता होगा, काफी देर तक विश्वास ही नहीं हुवा. 

उसके पश्चात् श्री. बादल सरोज (Central Committee member and Secretary Madhya Pradesh Committee, CPM) इनकी व्हाट्सअप पर पोस्ट पढ़ने में आयी. तब पता चला मोहम्मद युसूफ तारिगामी कौन हैं और उनका संघर्ष क्या रहा.

आइये जानते हैं श्री. बादल सरोज के ही कलम से.... 


#ऐसे_हैं_कामरेड_युसुफ़_तारिगामी

ताकि सनद रहे और आगामी विमर्श में काम आये;
आज श्रीनगर हवाई अड्डे पर सीताराम येचुरी और डी राजा को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब वे जेल में अस्वस्थ युसुफ़ तारिगामी से मिलने जा रहे थे । कौन हैं ये तारिगामी?

जम्मू-काश्मीर विधानसभा में सीपीआई(एम) के विधायक हैंमोहम्मद युसूफ तारिगामी । काश्मीर घाटी में आतंकवाद के विरुध्द जनता की लड़ाई के बड़े यौद्धा ।  सीपीआई(एम) हर तरह के आतंकवाद से लड़ती है लगातार उनके खिलाफ जनता को आंदोलित करती रहती है । काश्मीर में अब तक मुख्य खतरा सीमा पार से आने वाले पाकिस्तानी प्रशिक्षण प्राप्त आतंकी और सऊदी मदद से फैलने पनपने वाला इस्लामिक तत्ववादी आतंकवाद है, (और चिरकुटों की बात में मत आइये, कश्मीर का अवाम हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ है ।)
इसलिए मुख्य सरगर्मियां उसी के खिलाफ है । नतीजे में ये आतंकवादी कामरेड तारिगामी के परिवार के छह सदस्यों की ह्त्या कर चुके है. उनके श्रीनगर स्थित एमएलए फ्लैट पर आत्मघाती गिरोह दो-तीन बार हमला कर चुका है. इस छोटी सी पार्टी के 12 नेताओं की ह्त्या अब तक की जा चुकी है.

मगर सीपीआई(एम) ने इस्लामिक आतंकवाद और पाकिस्तानी-अमरीकी साजिशों के खिलाफ लड़ना बंद नहीं किया है. काश्मीरी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की मुखर हिमायत छोड़ी नहीं. राष्ट्रीय एकता के मामले में यह अकेला उदाहरण नहीं है. पंजाब से गोरखालैंड होते हुए त्रिपुरा तक अनेक हैं। बाकी पर अलग से कभी ।

मौत किसी की भी हो बुरी होती है, मगर सिर्फ रिकॉर्ड के लिए यह रेखांकित किया जाना जरूरी है कि जो पार्टी कश्मीर के सवाल पर देश भर में चीख पुकार मचाती है, उस पार्टी के एक भी कार्यकर्ता के साथ ऐसा दुर्भाग्य नहीं घटित हुआ. उसके नेता जम्मू के अलावा घाटी में झाँकने तक नहीं जाते. 

वजह साफ़ है ; दोनों तरह के आतंकी और उग्रवादी एक दूसरे के पूरक होते हैं, इसलिए वे कभी आपस में एक दूजे को नुक्सान नहीं पहुंचाते. इराक़ के बगदादी और इजरायली गिरोहों की एक दूसरे के प्रति रागात्मकता से इसे समझा जा सकता है. 

हर तरह की संकीर्णता, आतंकवाद,हिंसा देश और समाज की एकता में घातक है. वह हिंदुत्व का बाना ओढ़कर हो या इस्लाम का या यहूदीवाद और पोपका ; इनसे संघर्ष मानवता के लिए है-किसी छोटे या टुच्चे पद के लिए नहीं.

● 2014 के लोकसभा चुनाव में कामरेड युसुफ़ ग्वालियर आये थे । यहां की पहली सभा में बोलते हुए मोहम्मद युसूफ तारिगामी - सीपीआई(एम) केंद्रीय समिति के सदस्य और जम्मू कश्मीर के विधायक - के भाषण को सुनकर मौजूद लोग पहले अभिभूत हुए, फिर स्तब्ध रह गए और आखिर में सन्न रह गए !!!

एक गैर पार्टी सुधी सज्जन बोले की इस पूरे भाषण को अगर टीवी चेनलो पर दिखा दिया जाए तो काश्मीर और मुल्क के राजनीतिक हालात के बारे में सारा नजरिया बदल जाएगा। मगर शासकवर्ग न दिखाएँगे न छापेंगे।  उनकी सियासत के लिए भट्टी का सुलगता रहना और उसमे लाशों का झोंका जाना जरूरी शर्त है।

(कामरेड तारिगामी की सेहत की बेहतरी के लिए शुभकामनाओं के साथ एक और रीपोस्ट)

बादल सरोज से साभार



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