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Benefits of Goumutra Ark for Cancer Patient



In Ayurveda, Gomutra occupies a unique place and has been recognized as Elixir in Indian tradition. In Sushruta Samhita, it is considered to be the most effective substance of animal origin.

In India, drinking cow urine has been in practice for thousands of years. Many people also raise questions on its drinking, but they have not been able to dismiss the medicinal properties of Gomutra extracts completely. There have been some modifications to the medicinal properties of cow urine.

One such research was studied on the effect of Gomutra extract on alloxan-induced diabetes found in animals. Wistar albino mice weighing 200–250 grams were used in this study. Biochemical parameters such as blood sugar, vitamin C and malondialdehyde release were measured. In this experiment, when the use of cow urine extract was found to significantly reduce blood sugar and toxic elements in diabetic rats.

In the previous article, we learned about the diverse benefits of Gomutra extract from Pune's famous Vaidya Ajit Udavant. Today, in this article from him, we have tried to know about the use of cow urine in severe diseases like cancer. Hope you like it.

In the last few years, we are seeing that cancer disease has spread very fast. Today, medical science has made a lot of progress, but still, cancer is a very serious disease. To cure this disease, a lot of expenses are incurred by the patient and his family and there is a rounding up of big hospitals.

Costly treatments like chemotherapy, laser therapy, or sometimes surgery have to be done. But 'Gomutra' can play a very important role in curing a serious illness like cancer. Only we need to use it properly.  

Let me tell you that, as far as India is concerned, today more than 1300 people in India lose their lives due to cancer. Also, it is increasing in the last few years. Different types of treatment exist today to deal with this serious disease, but most of them are quite expensive, due to which poor and middle-class people cannot afford it. Goumutra can prove to be a Sanjeevani herb for such people.


Goumutra Medicine: It has been proved to be an anti-cancer treatment with various experiments today. Various types of components present in the cow urine are used to prevent cancer. Goumutra works to correct the defect in our body's genes. Genes malfunction is the biggest reason behind cancer. This component present in cow urine is very important.

Apoptosis

In this process, spoiled muscles kill themselves. Like, white blood cells commit suicide due to some chemical substances. The tendency of apoptosis of white blood cells that fight cancer disease increases.

Anti-oxidant

Due to the volatile fatty acids present in the cow urine, it reduces the breakdown in genes (DNA). Click here to learn more about anti-oxidant.

Disinfectant

Goumutra has antiviral components. They restrict the viruses that are formed to be cancer.

Bio-enhancing properties

It means to soak any medicine in a useful way by the body. This capacity increases due to nutrients in cow urine. Due to this process, despite the less use of medicines, good results start appearing in the body. This is particularly visible in the context of an anti-cancer component named Taxol.

Anti-free radical properties

Free radicals present in the body damage the muscles, which helps in increasing the muscle of cancer. The cow urine extract works to stop the muscles of cancer. Click here to learn more about free radicals.

Enabling immunity

Goumutra increases the production of macrophages and T and I lymphocytes. Also, cellular and humoral strengthen these two types of repulsive power, which helps a lot in preventing cancer.

Cow urine has received US patent for its medicinal properties. It is specifically known as a bio enhancer and as an antibiotic, antifungal and anticancer agent. It has been proved to increase the potency of "taxol" (paclitaxel) against the breast cancer cell line, MCF-7 that occurs in humans.

Indian cow

After the chemical practice of foreign buffalo and urine of cows of foreign species, it has been found that all these components are found only in cows of Indian descent on a large scale, while in cows of foreign descent, this important component is negligible.

Due to the chemical elements in the cow urine of Indian cows descent, the speed of absorption of medicines in the body increases. Along with this, anti-disease power also increases, which is proving to be very effective in preventing serious diseases like cancer.


For more information contact- 

Vaidya Ajit S. Udawant

Go-Vigyan Research Centre, Pune

Mobile 9881974054




















कैन्सर के इलाज में गुणकारी है ‘गौमूत्र अर्क’


आयुर्वेद में, गोमूत्र एक अद्वितीय स्थान पर है और भारतीय परंपरा में इसे अमृत रूप में मान्यता दी गई हैं. सुश्रुत संहिता में, इसे पशु उत्पत्ति का सबसे प्रभावी पदार्थ माना गया हैं.  भारत में, हजारों वर्षों से गोमूत्र पीने का चलन है. इसके पीने पर काफी लोग सवाल भी उठाते हैं, लेकिन वह गौमूत्र अर्क के औषधीय गुणों को सिरे से खारिज कर नहीं पाए हैं. गौमूत्र के औषधीय गुणों पर बहोत कुछ संशोधन किया गया हैं. 

ऐसा ही एक संशोधन प्राणियों में पाए जाने वाले मधुमेह (alloxan-induced diabetes) पर गोमुत्र अर्क के प्रभाव का अध्ययन किया गया था. इस अध्ययन में 200-250 ग्राम वजन वाले विस्टार एल्बिनो चूहों का उपयोग किया गया था. रक्त शर्करा, विटामिन सी और malondialdehyde रिलीज जैसे जैव रासायनिक मापदंडों को मापा गया. इस प्रयोग में जब गौमूत्र अर्क के उपयोग के बाद डायबिटिक चूहों में रक्त शर्करा और विषैले तत्वों में काफी कमी पायी गयी. 

पिछले आर्टिकल में हमने पुणे के प्रसिद्ध वैद्य अजित उदावंत से गौमूत्र (gomutra) अर्क के विविध लाभों के बारे में जाना था. आज उन्ही से इस आर्टिकल में हमने कैंसर जैसी गंभीर बिमारी में गौमूत्र के उपयोग के बारे में जानने की कोशिश की हैं. आशा हैं यह आपको पसंद आएगा. 

पिछले कुछ वर्षों में हम देख रहे हैं कि, कैन्सर की बीमारी का काफी तेजी से फैलाव हुआ है. आज मेडिकल साइन्स काफी प्रगति कर चुका है, लेकिन फिर भी काफी गंभीर रोगों में कैन्सर की बीमारी शुमार है. इस बीमारी को ठीक कराने में मरीज और उसके परिजनों के काफी फैसे खर्च होते है तथा बड़े-बड़े अस्पतालों के चक्कर कांटने पड़ते है.

केमोथेरेपी, लेजर थेरेपी जैसे महंगे इलाज या कई बार सर्जरियां करनी पड़ती है. लेकिन कैन्सर जैसी गंभीर बीमारी को ठीक कराने में ‘गौमूत्र’ काफी अहम भूमिका अदा कर सकता है. जरुरत है केवल हमें इसके सही इस्तेमाल की.  

आपको बता दें कि, जहां तक भारत का संबंध है आज भी भारत में करीब 1300 से अधिक लोक कैन्सर की बीमारी के चलते अपना जीवन गंवा देते है. साथ ही इसमें पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी हो रही है. इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए आज विभिन्न तरह के इलाज मौजूद है, लेकिन इनमें से ज्यादातर काफी महंगे होते है, जिससे गरीब और मध्यवर्ग के लोग अफोर्ड नहीं कर सकते. ऐसे मरिजों के लिए गौमूत्र एक संजीवनी बूटी की तरह सिद्ध हो सकता है.




गौमूत्र चिकित्सा यह एक कर्करोग विरोधी इलाज होने की बात आज विभिन्न प्रयोगों के साथ साबित हुई है. कैन्सर को रोकने के लिए गौमूत्र में मौजूद विभिन्न तरह के घटक कारण बनते है. गौमूत्र हमारे शरीर के जीन्स में हुई खराबी को सुधारने का काम करता है. जीन्स में हुई खराबी ही कैन्सर होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है. गौमूत्र में मौजूद यह घटक काफी अहम है.

एपोप्टोसिस

इस प्रक्रिया में खराब हुई पेशियां अपने आप को खत्म कर लेती है. जैसे सफेद रक्तपेशियां कुछ रासायनिक द्रव्यों के चलते खुदकुशी कर लेती है. कैन्सर की बीमारी से लड़ने वाली सफेद रक्तपेशियों की एपोप्टोसिस की प्रवृत्ति बढ़ती है.

एन्टी ऑक्सिडंट

गौमूत्र में मौजूद वोलाटाईल फैटी एसिड के चलते जीन्स (डीएनए) में होने वाली खराबी को कम करता है. एंटी ऑक्सीडेंट के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.

जंतुनाशक

गौमूत्र में विषाणुरोधक घटक मौजूद होते है. कैन्सर होने के लिए जो विषाणू कारक बनते है उसे वे प्रतिबंध करते है.

बायो एन्हासिंग गुण

इसका मतलब है किसी भी दवाई को शरीर द्वारा उपयोगी तौर पर सोख लेना. गौमूत्र में पोषक तत्वों के चलते इस क्षमता में बढ़ोतरी होती है. इसके चलते दवाईयों के कम इस्तेमाल के बावजूद भी शरीर में अच्छे परिणाम दिखने लगते है. विशेष तौर पर टैक्जोल नाम के कैन्सरविरोधी घटक के संदर्भ में यह बात दिखाई देती है.

फ्री रैडिकल विरोधी गुण

शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल पेशियों को नुकसान पहुंचाते है, जिससे कैन्सर की पेशियों को बढ़ने में मदद मिलती है. गौमूत्र कैन्सर की पेशियों को रोकने का काम करता है. फ्री रेडिकल्स के बारे में अधिक जानने यहाँ क्लिक करें


रोग प्रतिकारक शक्ति सक्षम करना

गौमूत्र मैक्रोफेज तथा टी और आई लिम्फोसाईट का उत्पादन बढ़ाता है. साथ ही सेल्युलर और ह्युमोरल इन दो प्रकार की प्रतिकारक शक्ति को मजबूत करता है, जिससे कैन्सर की रोकथाम करने में काफी मदद मिलती है.

गोमूत्र को इसके औषधीय गुणों के लिए यूएस पेटेंट मिला हैं. इसे विशेष रूप से एक बायोएन्हेंसर के रूप में और एक एंटीबायोटिक, एंटिफंगल और एंटीकैंसर एजेंट के रूप जाना जाता हैं. यह मनुष्यों में होने वाले स्तन कैंसर कोशिका रेखा MCF-7 के खिलाफ "टैक्सोल" (पैक्लिटैक्सेल) की शक्ति बढ़ाने के लिए माना गया है.

भारतीय गाय

विदेशों की भैस तथा विदेशी प्रजाति के गायों के मूत्र का रासायनिक अभ्यास करने के बाद यह पता चला है कि, यह सभी घटक केवल भारतीय वंश की गायों में बड़े पैमाने पर मिले है, जबकि विदेशी वंश की गायों में यह महत्वपूर्ण घटक ना के बराबर है.

भारतीय वंश की गायों के गौमूत्र में रासायनिक तत्वों के चलते दवाइयों को शरीर में सोखने की गति बढ़ती है. साथ ही रोग प्रतिकारक शक्ति भी बढ़ती है, जोकि कैन्सर जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने में काफी कारगर साबित हो रही है.


अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 

Vaidya Ajit S. Udawant

गोविज्ञान अनुसंधान संस्था, पुणे.

मो. 9881974054

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