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How to Take Care of Liver for Healthy Life

How to Take Care of Liver for Healthy Life
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The liver is an important part of our body. But today's changing lifestyle, modern eating habits, and wrong time table of consuming food, consumption of alcoholic things, the liver has to face many diseases.

Any person can face different problems due to liver failure, so for the sake of living a healthy life, liver care should be kept in mind, such information was given by Dr. Sanjay Salunke, a renowned gastroenterologist surgeon of Inamdar Hospital located in Fatima Nagar, Pune.

Dr. Salunke told that people are compelled to live a life full of running in the last few years. Due to this, people do not get to sit down and eat food, nor do they get a chance to do physical exercise. Apart from this, different types of stress are increasing in the competition era. In this whole process, the problem of obesity has increased in many people.

The more obesity increases in the body, the higher the risk of liver diseases increases. Due to lack of any kind of balance in terms of food and drink, many times the liver is affected. If the liver becomes affected, then we come in the grip of many diseases. Many times someone has Hepatitis B or C, which directly affects the liver.

Liver disease can also be genetic.


At times, symptoms do not appear in liver disease. But some of the following symptoms of liver disease can be identified.

  • Yellowing of skin and eyes (jaundice)
  • Abdominal pain and internal inflammation.
  • Swelling on feet and ankles.
  • itchy skin
  • Dark-colored urine
  • Yellowish stool
  • Excessive fatigue
  • Vomiting or nausea
  • Loss of appetite
The liver can also be threatened by scarring (cirrhosis). Due to which liver failure can be life-threatening. But initial treatment can give the liver time to recover.

If you notice any symptoms, contact your doctor immediately. If you are having unbearable pain in the stomach, seek medical attention immediately.

4 stages of liver failure

Stage 1: Liver swelling

One of the main functions of the liver is to detoxify your blood with the food and toxins found in it. Inflammation is the first sign of liver disease. Excess amounts of toxins are indicated by your immune system, due to which your liver can grow in size.

There can be many reasons for inflammation. Excess liver fat, an excessive amount of toxins or viral infections can weaken your liver and cause inflammation.

Stage 2: Fibrosis

If you do not treat inflammation, then inflammation starts reducing liver functions. In the next stage, instead of healthy liver tissue, your liver will start taking small stained tissue, which will reduce your liver functions. This whole process is called fibrosis.

When the liver reduces functioning, toxins and fats begin to accumulate in the liver. Along with reduced liver functions, small stains obstruct the blood flow to reach the rest of the organs.

At this stage, due to appropriate changes in medication and lifestyle, liver disease can be prevented from becoming serious. The liver has amazing self-healing abilities that increase the efficiency of medicines you take.

Stage-3 cirrhosis

After fibrosis, you are at risk for the next stage called cirrhosis, if fibrosis is not treated properly. At this stage, the self-healing ability of the liver is lost. Even though the development of cirrhosis disease can sometimes take 20 to 30 years. The unfortunate thing is that this disease is also detected very late when the symptoms are more clearly visible.

Cirrhosis is the cause of many complications in your body. In which fatigue is predominantly felt; Weakness; itching; loss of appetite; Rapid weight loss; Nausea; Flatulence due to ascites, which creates fluid in the stomach.

Edema - swelling on the inner body, legs, ankles, due to fluid, and jaundice.

Cirrhosis causes many fatal diseases in the body including liver cancer.

स्टेज-4 लिवर फेलियर

In this stage, the liver loses its ability to recover completely. Liver failure can occur in both chronic or acute conditions. Over toxicity or drug overdose can cause acute liver failure. In this situation, liver failure can occur in only 48 hours.

While chronic liver failure due to cirrhosis is a process of years. When the liver fails, the best option is a liver transplant. Organ donors are needed for such patients. Read our article on organ donation An organ donor can save hundreds of lives!

The digestive system causes many problems 

As we have seen, due to the runaway life of humans, their food and drink are getting affected. Just as it has an effect on the liver, similarly the digestive system of the body also has a very bad effect. Due to a poor digestive system, it also has a serious effect on various parts of the body.

What is gastroenterology?

To overcome this, a lot of research has been done in the last few years. After the research in medical science, the gastroenterology branch emerged, which is also called 'जठरांत्र विज्ञान' in Hindi. In the study of this branch, all organs related to the digestive system of humans are treated and treated with reference to diseases occurring in them.

Because in today's busy life, food habits have changed a lot. Due to which the digestive system is spoiled. Due to this, various types of diseases occur in the body. If these diseases are not treated soon, then it assumes a serious form.

Click here to read this article in English

स्वस्थ जीवन के लिए लीवर का ख्याल कैसे रखें?

How to Take Care of Liver for Healthy Life
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लीवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है. लेकिन आज की बदलती जीवनशैली, खान-पान की आधुनिक आदतें तथा वक्त-बेवक्त का खाना, अल्कोहोलिक चीजों का सेवन से लीवर को कई सारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

लीवर खराब होने पर किसी भी व्यक्ति को विभिन्न तरह की समस्याएं आ सकती है, इसलिए इसलिए स्वस्थ जीवन जीने के लिए लीवर का ख्यास ध्यान रखना चाहिए, ऐसी जानकारी फातिमा नगर में स्थित इनामदार हॉस्पीटल के विख्यात गैस्ट्रोइन्टेरोलॉजीस्ट सर्जन डॉ. संजय सालुंके ने दी.

डॉ. सालुंके ने बताया कि, बीते कुछ वर्षों में भागदौड़ से भरी जिंदगी जीने पर लोग मजबूर है. इसके चलते लोगों के पास ना चैन से बैठकर खाना खाने को मिलता है, ना ही उन्हें शारीरिक कसरत करने का मौका मिलता है. इसके अलावा प्रतिस्पर्धा के युग में विभिन्न तरह का स्ट्रेस बढ़ रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में कई लोगों में मोटापे की समस्या बढ़ गई है.

शरीर में जितना ज्यादा मोटापा बढ़ेगा उतना ही ज्यादा लीवर की बीमारियों का खतरा बढ़ता है. खाने-पिने के संदर्भ में किसी भी प्रकार का संतुलन ना होने के चलते भी कई बार लीवर पर काफी बुरा असर पड़ता है. लीवर खराब हो जाए तो कई तरह बीमारियों की चपेट में हम आ जाते है. कई बार किसी को हेपीटायटीस बी या सी होता है, जिसका सीधा असर लीवर पर ही होता है.

लीवर की बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती हैं.


लिव्हर कि बिमारी में कई बार लक्षण दिखाई नहीं देते. पर निम्नलिखित कुछ लक्षणों से लिवर की बिमारी की पहचान की जा सकती हैं.

  • त्वचा और आँखें पीले रंग की दिखाई देना (पीलिया)
  • पेट में दर्द और आतंरिक सूजन।
  • पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देना. 
  • त्वचा में खुजली
  • गहरे रंग का मूत्र
  • मल का रंग पीला होना
  • अत्यधिक थकान
  • उलटी अथवा मितली
  • भूख ना लगना
स्कारिंग (सिरोसिस) से भी लिवर को खतरा हो सकता हैं. जिससे यकृत का विफल होने जैसे स्थितियों में जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता हैं. लेकिन शुरुआती उपचार से लीवर को ठीक होने का समय मिल सकता हैं. 

यदि आपको कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क तुरंत संपर्क करें. अगर आपको पेट में असहनीय दर्द हो रहा है, तो तुरंत चिकित्सा कीजिये. 

लिवर फेलियर की 4 स्टेजेस 

स्टेज 1: लिवर पर सूजन

लीवर का एक मुख्य कार्य खाए जाने वाले भोजन और में पाए जाने वाले विषाक्त पदार्थों से आपके रक्त को डिटॉक्सिफाई करना करना होता हैं. लिवर की बिमारी का पहला संकेत सूजन हैं. विषाक्त पदार्थों की अतिरिक्त मात्रा होने का संकेत आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा दिया जाता  हैं, इससे आपका लिवर आकार में बड़ा हो सकता हैं.

सूजन के कई कारण हो सकते हैं. लिवर में अतिरिक्त फैट्स  होना, अधिक मात्रा में विषाक्त पदार्थों पाए जाना या वायरल संक्रमण आपके लिवर को कमजोर कर सकता है और सूजन पैदा कर सकता हैं.

स्टेज-२: फाइब्रोसिस 

यदि आप सूजन का इलाज नहीं करते हैं, तो सूजन लिवर के फंक्शन्स को कम करने लगती हैं. इसके अगले चरण में लिवर के स्वस्थ टिश्यू की जगह छोटे दाग वाले टिश्यू लेना शुरू कर देंगे जिससे आपके लिवर के फंक्शन्स कम हो जाएंगे. इस पूरी प्रक्रिया को फाइब्रोसिस कहा जाता हैं.

जब लिवर के कार्य करना कम हो जाते हैं तो टॉक्सिन्स और फैट्स लिवर में जमा होने का सिलसिला शुरू रहता हैं. लिवर के फंक्शन्स कम होने के साथ साथ छोटे दाग रक्त प्रवाह को बाकी के अंगों तक पहुँचने में अवरोध पैदा करते हैं.

इस स्टेज में दवा और जीवनशैली में उचित बदलाव से लिवर की बिमारी को गंभीर होने से बचाया जा सकता हैं. लिवर में अद्भुत सेल्फ हीलिंग क्षमता होती है जो आपके द्वारा ली गयी दवाइयों की क्षमता को बढ़ाती हैं.

स्टेज-3 सिरोसिस

फाइब्रोसिस के बाद आपको सिरोसिस नामक अगले चरण का खतरा होता है, यदि फाइब्रोसिस का ठीक से इलाज ना हो तो. इस स्टेज में लिवर की सेल्फ हीलिंग क्षमता ख़त्म हो जाती हैं. भले ही सिरोसिस की बिमारी के विकास में कभी-कभी 20 से 30 साल लग सकते हैं. दुर्भाग्य की बात यह हैं कि, इस बिमारी का पता भी काफी देर से चलता  हैं, जब लक्षण अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं.

सिरोसिस आपके शरीर में कई जटिलताओं का जन्मदाता होता हैं. जिसमें प्रमुख रूप से थकान महसूस  होना; कमजोरी; खुजली; भूख ना लगना; तेजी से वजन घटना; जी मिचलाना; जलोदर की वजह से पेट का फूलना, जो पेट में तरल पदार्थ का निर्माण करता हैं.

एडिमा - तरल पदार्थ के निर्माण के कारण अंदरूनी तथा पैरों, टखनों पर सूजन, पीलिया.

सिरोसिस लिवर कैंसर सहित कई घातक बीमारियों को शरीर में पैदा करता हैं.

स्टेज-4 लिवर फेलियर

इस स्टेज में लिवर ठीक होने की क्षमता पूरी तरह खो देता हैं. लिवर की विफलता क्रोनिक या एक्यूट ऐसी दोनों स्थितियों में हो सकती हैं. विषाक्त पदार्थ या दवा की अधिक मात्रा शरीर में जाने की एक्यूट लिवर फेलियर हो सकता हैं. इस स्थिति में केवल 48 घंटों में लिवर फ़ैल हो सकता हैं.

जबकि सिरोसिस की वजह से क्रोनिक लीवर फेल्योर होना वर्षों की प्रक्रिया होती हैं. जब लिवर विफल होता हैं, तो इसका सबसे अच्छा विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट ही होता हैं. ऐसे पेशेंट्स के लिए अंगदाता की जरुरत होती हैं. ऑर्गन डोनेशन के लिए पढ़ें हमारा आर्टिकल An organ donor can save hundreds of lives!

पाचन तंत्र से भी उभरती है कई समस्याएं?

जैसा की हमने देखा कि, मनुष्य की भागदौड़ से भरी जिंदगी के चलते उनके खान-पान पर असर हो रहा है. जिस तरह इसका असर लीवर पर होता है, उसी तरह शरीर के पाचन तंत्र पर भी काफी बुरा असर पड़ता है. पाचनतंत्र खराब होने के चलते शरीर के विभिन्न अंगों पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है.

क्या है गैस्ट्रोइन्टेरोलॉजी?

इससे उबारने के लिए पिछले कुछ वर्षों में काफी अनुसंधान हुए है. मेडिकल साइन्स में हुए अनुसंधानों के बाद गैस्ट्रोइन्टेरोलॉजी शाखा का उदय हुआ, जिसे हिंदी में ‘जठरांत्र विज्ञान’ भी कहा जाता है. इस शाखा के अध्ययन में मनुष्य के पाचन तंत्र से संबंधित सभी अंगों का क्रियान्वयन और उनमें होने वाली बीमारियों के संदर्भ में इलाज किया जाता है.

क्योंकि आज की भागदौड़ से भरी जिंदगी में खान-पान की आदतें काफी बदल गई है. जिससे पाचन क्रिया खराब होती है. इसीसे शरीर में विभिन्न तरह की बीमारियां होती है. इन बीमारियों का इलाज जल्द नहीं किया गया, तो यह गंभीर स्वरूप धारण कर लेती है. 
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